शिवपुर-चरचा में चुनावी बुखार चरम पर, बैकुंठपुर में सड़क चौड़ीकरण के मुद्दे पर पसरा सन्नाटा! कहीं चाय की दुकानों पर टिकट को लेकर चर्चाओं का दौर, तो कहीं विकास के मुद्दों पर भी बोलने से कतरा रहे संभावित प्रत्याशी


कोरिया बैकुंठपुर । कोरिया जिले की नगर पालिका परिषद शिवपुर-चरचा में आगामी नगरीय निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होती नजर आ रही हैं। नगर की गलियों से लेकर चाय की दुकानों और सार्वजनिक स्थानों तक चुनावी चर्चाओं का माहौल गर्म है। राजनीतिक दलों के भीतर भले ही अभी शांति दिखाई दे रही हो, लेकिन टिकट को लेकर आम लोगों के बीच तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कौन किस पार्टी से चुनाव मैदान में उतरेगा, किसे टिकट मिलेगी और किसका राजनीतिक समीकरण मजबूत होगा, इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

शिवपुर-चरचा में फिलहाल चुनावी गतिविधियों को लेकर एक अलग ही उत्साह देखने को मिल रहा है। चाय की दुकानों पर बैठने वाले लोग भी स्थानीय राजनीति, संभावित प्रत्याशियों और वार्डों के समीकरणों पर खुलकर अपनी राय रख रहे हैं। कोई पुराने चेहरों की वापसी की संभावना जता रहा है, तो कोई नए चेहरों को मौका देने की बात कर रहा है। कुल मिलाकर नगर पालिका परिषद शिवपुर-चरचा में चुनावी बुखार अपने चरम पर पहुंचता दिखाई दे रहा है।

शिवपुर-चरचा में टिकट को लेकर चर्चाओं का दौर------

नगर पालिका चुनाव की संभावित हलचल के बीच राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों की निगाहें टिकट वितरण पर टिकी हुई हैं। हर वार्ड में संभावित प्रत्याशियों को लेकर चर्चाएं हो रही हैं। राजनीतिक दल किस आधार पर उम्मीदवारों का चयन करेंगे और किसे जनता के बीच अपनी लोकप्रियता साबित करने का अवसर मिलेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

हालांकि अभी राजनीतिक दलों की ओर से सार्वजनिक रूप से बहुत कुछ सामने नहीं आया है, लेकिन आम लोगों के बीच चुनावी चर्चाओं ने माहौल को पूरी तरह राजनीतिक रंग दे दिया है। चुनावी माहौल में सबसे दिलचस्प बात यह है कि राजनीतिक दलों की खामोशी के बावजूद जनता के बीच चुनावी चर्चाएं लगातार जारी हैं।

बैकुंठपुर नगर पालिका में अलग तस्वीर, सड़क चौड़ीकरण बना बड़ा मुद्दा-----

दूसरी ओर जिला मुख्यालय बैकुंठपुर की नगर पालिका परिषद में चुनावी माहौल को लेकर बिल्कुल अलग तस्वीर नजर आती है। यहां चुनावी चर्चा और राजनीतिक सक्रियता की जगह एक तरह की खामोशी दिखाई दे रही है। इसकी एक बड़ी वजह शहर का बहुचर्चित सड़क चौड़ीकरण का मुद्दा माना जा रहा है।

सड़क चौड़ीकरण को लेकर आम मतदाताओं के बीच लगातार चर्चाएं हो रही हैं। शहर के नागरिक इस विषय पर अपनी राय खुलकर रख रहे हैं। किसी के लिए यह शहर के विकास और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने का सवाल है, तो किसी के लिए यह प्रभावित लोगों के हितों और उनकी समस्याओं से जुड़ा गंभीर विषय है।

आम नागरिकों के बीच सड़क चौड़ीकरण को लेकर जितनी मुखरता दिखाई दे रही है, उतनी राजनीतिक स्तर पर नजर नहीं आ रही। संभावित प्रत्याशी भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने से बचते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब सड़क चौड़ीकरण शहर के विकास से जुड़ा इतना महत्वपूर्ण विषय है, तो चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे लोग इस पर अपनी स्पष्ट राय रखने से क्यों कतरा रहे हैं?

विकास भी चाहिए और जनता के सवालों का जवाब भी------

बैकुंठपुर की चुनावी खामोशी के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि शहर के मतदाता विकास चाहते हैं, बेहतर सड़कें चाहते हैं और व्यवस्थित शहर की उम्मीद रखते हैं। लेकिन विकास के नाम पर उठने वाले सवालों का जवाब कौन देगा? सड़क चौड़ीकरण को लेकर आम जनता की चिंताओं और अपेक्षाओं को कौन अपनी चुनावी प्राथमिकता बनाएगा?

राजनीति में जनता के बीच जाने वाले जनप्रतिनिधियों और संभावित प्रत्याशियों से यह अपेक्षा स्वाभाविक है कि वे केवल चुनाव के समय ही नहीं, बल्कि शहर के महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी अपनी स्पष्ट राय रखें। विकास के पक्ष में खड़ा होना और प्रभावित नागरिकों की समस्याओं को समझना, दोनों ही जनप्रतिनिधित्व की जिम्मेदारी का हिस्सा हैं।

दो नगर पालिकाएं, दो अलग-अलग चुनावी तस्वीरें----

कोरिया जिले की इन दोनों नगर पालिकाओं की मौजूदा राजनीतिक तस्वीर अपने आप में चर्चा का विषय बन गई है। एक ओर शिवपुर-चरचा में टिकट की चर्चाओं ने चुनावी माहौल को गर्म कर दिया है, वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय बैकुंठपुर में सड़क चौड़ीकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे के कारण राजनीतिक खामोशी चर्चा में है।

शिवपुर-चरचा में लोग पूछ रहे हैं कि किसे टिकट मिलेगी और कौन चुनाव लड़ेगा, जबकि बैकुंठपुर में मतदाताओं के मन में यह सवाल है कि शहर के विकास और सड़क चौड़ीकरण जैसे मुद्दों पर कौन खुलकर अपनी बात रखेगा।

फिलहाल शिवपुर-चरचा में चुनावी चर्चाओं का तापमान लगातार बढ़ रहा है, वहीं बैकुंठपुर में सड़क चौड़ीकरण का मुद्दा संभावित प्रत्याशियों की राजनीतिक परीक्षा लेता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि शिवपुर-चरचा में टिकट की तस्वीर किस ओर जाती है और बैकुंठपुर में राजनीतिक दल तथा संभावित प्रत्याशी जनता के इस अहम सवाल पर अपना मौन तोड़ते हैं या नहीं।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ