कांग्रेस ने मांगी कांग्रेस से टिकट,....... तिवारी जी पहुंचे तिवारी जी के दरबार......!नगर पालिका शिवपुर-चरचा के वार्ड क्रमांक 15 में सियासी संयोग का अनोखा मुकाबला....., टिकट बंटने से पहले ही दिलचस्प हुआ मुकाबला..... दावेदारों के नाम में ही सियासी मसला.....



नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट 

चरचा  कालरी......राजनीति भी बड़े-बड़े दिलचस्प खेल दिखाती है। कभी एक ही पार्टी में टिकट के लिए घमासान होता है, तो कभी नाम ही सियासी चर्चा का विषय बन जाता है। लेकिन नगर पालिका शिवपुर-चरचा के आगामी नगरीय निकाय चुनाव में एक ऐसा दिलचस्प संयोग सामने आया है, जिसे सुनकर आप भी कह उठेंगे— कांग्रेस ने कांग्रेस से टिकट मांग ली और तिवारी जी ने तिवारी जी के दरबार में दस्तक दे दी!

जी हां, यह कोई चुनावी तुकबंदी नहीं, बल्कि वार्ड क्रमांक 15 की सियासत की दिलचस्प हकीकत है। दिसंबर 2026 में प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में चुनावी हलचल तेज हो चुकी है। हालांकि अभी तक दोनों पार्टियों ने न तो वार्ड पार्षद प्रत्याशियों और न ही नगर पालिका अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा की है, लेकिन टिकट के दावेदारों ने अपनी-अपनी जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है।

इन तमाम चर्चाओं के बीच वार्ड क्रमांक 15 सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है। यहां कांग्रेस पार्टी से कांग्रेस पोलार्ड ने टिकट की दावेदारी पेश की है, तो भाजपा की ओर से पूर्व पार्षद प्रदीप तिवारी ने जिला अध्यक्ष देवेंद्र तिवारी के समक्ष अपनी उम्मीदवारी रखी है। यानी मुकाबले से पहले ही नामों का ऐसा संयोग बन गया है कि वार्ड की चुनावी चर्चा में हास्य और राजनीति दोनों का तड़का लग गया है।

कांग्रेस पोलाई : कोल इंडिया की सेवा के बाद अब जनसेवा की तैयारी.......कांग्रेस पोलाई चरचा चर्चा कालरी में कर्मचारी के रूप में 40 वर्षों तक अपनी सेवाएं दे चुके हैं और डेढ़ वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने श्रमिक हितों के लिए एटक और इंटक जैसे श्रमिक संगठनों में विभिन्न पदों पर रहते हुए संघर्ष किया है। इसके साथ ही कांग्रेस संगठन से भी उनका लंबे समय से जुड़ाव रहा है। अब सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने कोल इंडिया की सेवा से आगे बढ़कर वार्ड की जनता की सेवा करने का संकल्प लिया है।

इन दिनों कांग्रेस पोलाई वार्ड क्रमांक 15 में सुबह से शाम तक सक्रिय नजर आ रहे हैं। वार्ड में फैली गंदगी और साफ-सफाई की समस्या को देखते हुए उन्होंने स्वयं के खर्च पर श्रमिक लगाकर सफाई अभियान शुरू किया है। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधि बनने से पहले भी जनता के काम आना जरूरी है। यही वजह है कि वे केवल चुनावी मुलाकातों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वार्ड की समस्याओं के समाधान के लिए स्वयं मैदान में उतर रहे हैं।मिलनसार व्यक्तित्व, सहयोगी स्वभाव और धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी के चलते उनकी लोकप्रियता भी चर्चा का विषय बनी हुई है। वे वार्डवासियों की समस्याओं के निराकरण, मूलभूत सुविधाओं के विस्तार और पार्षद निधि के खर्च का सार्वजनिक हिसाब रखने जैसे मुद्दों को अपनी प्राथमिकता बता रहे हैं। उनका दावा है कि यदि जनता ने अवसर दिया तो पार्षद निधि से होने वाले प्रत्येक कार्य और खर्च की जानकारी पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक की जाएगी। उन्होंने मांग की है कि पूर्व पार्षद प्रदीप तिवारी अपने 10 वर्षों के पार्षद निधि की पूर्ण जानकारी से वार्ड की जनता को अवगत कराए। 

प्रदीप तिवारी : पूर्व पार्षद के सामने साख बचाने की चुनौती......... प्रदीप तिवारी पूर्व में भाजपा के कार्यकर्ता थे फिर भाजपा छोड़ कांग्रेस की सदस्यता ले ली वर्ष 2021 में कांग्रेस पार्टी से प्रत्याशी बने थे और वर्ष 2024 में उन्होंने भाजपा की फिर से सदस्यता ले ली और अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव में उन्होंने भाजपा का साथ दिया भाजपा से टिकट के दावेदार प्रदीप तिवारी  वार्ड क्रमांक 15 की राजनीति में कोई नया चेहरा नहीं हैं। वे पूर्व में पार्षद रह चुके हैं, वहीं उनकी पत्नी सीमा तिवारी भी इसी वार्ड से एक बार पार्षद निर्वाचित हो चुकी हैं। इस लिहाज से तिवारी का वार्ड की राजनीति से पुराना जुड़ाव रहा है।प्रदीप तिवारी के सामने इस बार न केवल पार्टी से दोबारा टिकट हासिल करने की चुनौती है, बल्कि अपने पुराने राजनीतिक जनाधार और पार्षद के रूप में बनी साख को बरकरार रखने की भी परीक्षा होगी। पालिका के पार्षदों को एक कार्यकाल में लगभग 25 लाख रुपए की पार्षद नीति मिलती है और ₹300000 का मानदेय अलग से, कांग्रेस पार्टी के वार्ड प्रत्याशी दावेदार कांग्रेस पोलाई ने पार्षद नीति की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है,देखना यह है कि प्रदीप तिवारी विगत 10 सालों में प्राप्त पार्षद निधि की पूरी जानकारी  से जनता को अवगत कराते भी हैं या नहीं,,,,, पूर्व पार्षद होने के कारण उनके पास अनुभव है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस पोलाई नए अंदाज में जनसंपर्क और साफ-सफाई अभियान के जरिए मतदाताओं के बीच अपनी जगह बनाने में जुटे हैं।

सुबह से शाम तक मतदाताओं की पूछ-परख,......चुनाव अभी दूर है, टिकट की घोषणा भी नहीं हुई है, लेकिन वार्ड क्रमांक 15 का चुनावी माहौल अभी से गर्माने लगा है। दोनों ही दावेदार सुबह से शाम तक मतदाताओं के बीच पहुंच रहे हैं। लोगों का हालचाल पूछना, समस्याएं सुनना और सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बनता जा रहा है। मतदाताओं की बढ़ती पूछ-परख से वार्डवासियों के चेहरे पर भी मुस्कान नजर आने लगी है।हालांकि असली मुकाबला कौन लड़ेगा, इसका फैसला कांग्रेस और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को करना है। लेकिन टिकट की दावेदारी से लेकर जनसंपर्क तक वार्ड क्रमांक 15 ने अभी से चुनावी रंग पकड़ लिया है।

फिलहाल वार्ड की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस को कांग्रेस की टिकट मिलेगी या नहीं और तिवारी जी, तिवारी जी की उम्मीदों पर कितना खरा उतरेंगे? नामों के इस अनोखे संयोग ने चुनाव से पहले ही वार्ड क्रमांक 15 को चर्चा का केंद्र बना दिया है। अब देखना दिलचस्प होगा की टिकट की बाजी कौन मारता है और जनता किसके सिर पर पार्षद का ताज सजाती है। 

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