स्कूलों में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक कल्याण को मिलेगा बढ़ावा, तीन दिवसीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण आयोजित, यूनिसेफ और समग्र शिक्षा की संयुक्त पहल, TISS-SIMHA ने दिया तकनीकी सहयोग; प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स जिलों में शिक्षकों को करेंगे प्रशिक्षित


रायपुर। स्कूलों में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक मजबूती और मनोसामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राजधानी रायपुर के होटल सयाजी में 28 से 30 नवंबर 2026 तक तीन दिवसीय राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण आयोजित किया गया। यूनिसेफ द्वारा समग्र शिक्षा के सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) की स्कूल इनिशिएटिव फॉर मेंटल हेल्थ एडवोकेसी (SIMHA) ने तकनीकी साझेदार के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर शिक्षकों की भूमिका अहम,

बच्चों के बेहतर सीखने, शैक्षणिक उपलब्धियों और सर्वांगीण विकास में मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विशेष रूप से किशोरावस्था की शुरुआती अवधि बच्चों के जीवन का ऐसा महत्वपूर्ण चरण है, जिसमें वे शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्तर पर अनेक बदलावों से गुजरते हैं। इस दौरान उन्हें कई तरह की चुनौतियों और अवसरों का सामना करना पड़ता है।

ऐसे समय में स्कूल और शिक्षक बच्चों के लिए सुरक्षित, सकारात्मक, सहयोगपूर्ण एवं भरोसेमंद वातावरण तैयार करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसी उद्देश्य से आयोजित प्रशिक्षण में शिक्षकों और व्याख्याताओं की क्षमता विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि वे बच्चों की मानसिक एवं भावनात्मक जरूरतों को बेहतर तरीके से समझ सकें और जरूरत पड़ने पर उन्हें उचित सहयोग उपलब्ध करा सकें।

तनाव के संकेत पहचानने और बच्चों को सहयोग देने का मिला प्रशिक्षण,

तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बच्चों की भावनाओं को समझने, उनके व्यवहार में आने वाले बदलावों को पहचानने तथा तनाव और मानसिक परेशानी के शुरुआती संकेतों को समझने की जानकारी दी गई। इसके साथ ही बच्चों को तनाव से निपटने के सरल तरीके बताने, उनकी खूबियों एवं क्षमताओं को पहचानने और उन्हें प्रोत्साहित करने के व्यावहारिक उपायों पर भी प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि कक्षाओं में ऐसा वातावरण विकसित किया जाए, जहां प्रत्येक बच्चा स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और सहज महसूस कर सके। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे बच्चों को आवश्यकता के अनुसार उचित सहायता सेवाओं से जोड़ने यानी रेफरल की प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई।

प्रशिक्षण की पद्धति सहभागी एवं गतिविधि आधारित रही। इसमें समूह चर्चा, व्यावहारिक अभ्यास और प्रतिभागियों के अनुभवों के आदान-प्रदान के माध्यम से विषयों को सरल एवं प्रभावी ढंग से समझाया गया।

बस्तर संभाग के सात जिलों सहित धमतरी के शिक्षकों ने लिया हिस्सा,

इस राज्य स्तरीय प्रशिक्षण में बस्तर संभाग के सभी सात जिलों के साथ धमतरी जिले से चयनित शिक्षक एवं व्याख्याता शामिल हुए। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये मास्टर ट्रेनर्स अपने-अपने जिलों में अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। इसके माध्यम से स्कूलों में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक कल्याण से संबंधित गतिविधियों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य राज्य के अधिकाधिक स्कूलों में ऐसा सकारात्मक और सहयोगपूर्ण वातावरण तैयार करना है, जहां बच्चे बिना किसी भय, दबाव या भेदभाव के अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकें और अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ सकें।

बच्चों पर पढ़ाई और करियर का अनावश्यक दबाव नहीं होना चाहिए : श्री कौशिक,

इस अवसर पर समग्र शिक्षा के उप संचालक श्री कौशिक ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों के बीच प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है। आज हर बच्चा डॉक्टर या इंजीनियर बनना चाहता है। इसके चलते बच्चों पर पढ़ाई और करियर को लेकर काफी दबाव रहता है। ऐसे में बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होना बेहद जरूरी है, ताकि वे बिना किसी अनावश्यक दबाव के अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार अपने भविष्य एवं करियर का निर्माण कर सकें।

हर बच्चे को स्कूल में सुरक्षित और सम्मानित महसूस होना चाहिए : सीमा कुमार

यूनिसेफ छत्तीसगढ़ की प्रमुख सीमा कुमार ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को स्कूल में सुरक्षित और सम्मानित महसूस होना चाहिए। उसे यह एहसास होना चाहिए कि वह स्कूल के परिवेश का अभिन्न हिस्सा है। मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक सहयोग (MHPSS) देखभाल की एक सतत प्रक्रिया है, जो स्कूल, परिवार और समुदाय को आपस में जोड़ती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में बच्चों की मातृभाषा सुरक्षा, पहचान और अपनेपन की भावना विकसित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।

स्कूल केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं, सुरक्षा और सहयोग के स्थान भी बनें : रवि राज दयाल,

यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के शिक्षा विशेषज्ञ रवि राज दयाल ने कहा कि बच्चों के सीखने के परिणामों में सुधार और उनके मानसिक एवं भावनात्मक कल्याण को बढ़ावा देने के प्रयास एक साथ चलने चाहिए। स्कूल केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों को सुरक्षा, स्थिरता और सहयोग प्रदान करने वाले स्थान भी बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक सहयोग के क्षेत्र में शिक्षकों की क्षमता मजबूत करना एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे प्रत्येक बच्चे को सीखने, विकसित होने और जीवन में आगे बढ़ने का समान अवसर मिल सके।

 यह प्रशिक्षण छत्तीसगढ़ के स्कूलों में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में एक सार्थक पहल है। प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से यह प्रयास जिला स्तर तक पहुंचेगा, जिससे शिक्षकों में बच्चों की भावनात्मक जरूरतों को समझने और उन्हें उचित सहयोग देने की क्षमता विकसित होगी।

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